आज़रबैजान लोकतान्त्रिक गणराज्य की अस्सीवीं जयन्ती के समारोह के अवसर पर आयोजित मिल्ली मजलिस की विशेष बैठक में आज़रबैजान गणराज्य के राष्ट्रपति हैदर अलीयेव द्वारा दिया गया भाषण, 27 मई 1998


आदरणीय मिल्ली मजलिस!

आदरणीय अध्यक्ष महोदय!

आदरणीय सांसदगण! 

आज़रबैजान लोकतान्त्रिक गणराज्य की स्थापना की अस्सीवीं जयन्ती के अवसर मैं आप सबको हार्दिक बधाई देता हूँ और यह कामना करता हूँ कि आज़रबैजान की स्वतन्त्रता के विकास के लिए भविष्य में किए जाने वाले कामों में आपको सफलता मिले।

मैं हृदय से आप सबका अभिनन्दन करता हूँ, मिल्ली मजलिस के सभी सदस्यों के प्रति सम्मान अभिव्यक्त करता हूँ जो आज़रबैजान राज्य का शक्तिशाली पक्ष हैं। 

हम बड़े गर्व की भावना के साथ आज़रबैजान लोकतान्त्रिक गणराज्य की अस्सीवीं जयन्ती मना रहे हैं। इस सम्बन्ध में पिछले कुछ महीनों में आज़रबैजान गणराज्य में आयोजित हुए कार्यक्रमों, समारोहों तथा वैज्ञानिक सम्मेलनों के माध्यम से आधुनिक आज़रबैजान के सामने आज़रबैजान लोकतान्त्रिक गणराज्य की गतिविधियों को अधिक व्यापक रूप में प्रस्तुत किया गया है और इसके साथ ही पिछले अस्सी सालों में आज़रबैजान की जनता द्वारा तय किए गए मार्ग और उसकी उपलब्धियों की भी बहुत प्रशंसा हुई है।

आज़रबैजान लोकतान्त्रिक गणराज्य को अस्तित्व में आए बहुत अधिक समय नहीं हुआ है। परन्तु आज़रबैजान की जनता के जीवन में वह बीसवीं सदी का एक ऐतिहासिक चरण बन गया है जिसने हमारी जनता के भविष्य, स्वतन्त्रता, मुक्ति तथा प्रभुसत्ता की नींव रख दी है। इसीलिए आज़रबैजान के हम सब नागरिक आज़रबैजान लोकतान्त्रिक गणराज्य की स्थापना, इसकी गतिविधियों और इसके निर्माताओं तथा उन लोगों को भारी कृतज्ञता की भावना के साथ याद कर रहे हैं जिन्होंने उस समय वीरता के आदर्श प्रस्तुत किए थे। साथ ही उसके बाद के काल को भी हम ऊँचा आँक कर देखते हैं।

सन् 1918 में आज़रबैजान को जो आज़ादी हासिल हुई थी और जो बाद में हमसे छिन गई थी उसे आज़रबैजान की जनता ने सन् 1992 के अन्त में फिर से पा लिया था। अब छह सालों से हम स्वतन्त्रता की अवस्था में रह रहे हैं। आज़रबैजान ने पूरी दुनिया को अपनी स्वतन्त्रता प्रमाणित करके दिखा दी है, अन्तरराष्ट्रीय संगठनों में उसकी सम्पुष्टि की है तथा उसे स्थायित्व और स्थिरता प्रदान करने का आधार खड़ा कर दिया है। 

1918-1920 के सालों की तरह पिछले छह साल का समय भी बहुत कठिन और जटिल रहा है। हम पूरे गर्व के साथ कह सकते हैं कि हमने उन कठिनाइयों को पार कर लिया है, फिर भी हमारा देश जटिल परिस्थितियों में रहता आ रहा है और आगे चल कर हम सफलतापूर्वक रह सकेंगे।

स्वतन्त्र आज़रबैजान को विधिसम्पन्न तथा नियमानुकूल आधार प्रदान करने के उद्देश्य से आज़रबैजान की संसद – मिल्ली मजलिस – ने बीते सालों में बहुत बड़ा काम किया है। नवम्बर 1995 में आम जनमतसंग्रह द्वारा स्वतन्त्र आज़रबैजान तथा आज़रबैजान गणराज्य के पहले लोकतान्त्रिक संविधान का अपनाया जाना बीसवीं शताब्दी की एक ऐतिहासिक घटना है। 12 नवम्बर 1995 को लोकतान्त्रिक विधि से सम्पन्न हुए खुले, स्वतन्त्र और निष्पक्ष चुनावों के द्वारा बहुदलीय प्रणाली के आधार पर स्वतन्त्र आज़रबैजान की पहली संसद का गठन हुआ था।

उस समय से ही हमारी संसद सफलतापूर्वक काम करती आ रही है तथा राज्य-निर्माण, राजनीतिक और आर्थिक सुधारों के क्रियान्वयन तथा आज़रबैजान की स्वतन्त्रता की मज़बूती और विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदर बनी हुई है। मिल्ली मजलिस का काम, विशेषकर पिछले कुछ समय में किया गया, बहुत ही प्रशंसनीय है। साल-ब-साल हमारे राज्य के तथा सरकार के अंग संविधान द्वारा उन्हें प्रदत्त प्रकार्यों और प्राधिकारों के मामले में अभ्यस्त होते जा रहे हैं। उन प्राधिकारों और सिद्धान्तों को वे ठीक से अपना रहे हैं। इससे राज्य के प्रत्येक अंग को अपने-अपने प्राधिकारों की सीमाओं में रहते हुए सफलतापूर्वक काम करने का अच्छा अवसर मिल रहा है।

इस दृष्टि से से देखें तो आज़रबैजान की संसद – मिल्ली मजलिस – की पिछले कुछ समय की गतिविधियाँ बहुत ही अनुमोदनीय तथा प्रशंसनीय हैं।

हमारे जीवन का आधार है - कानून। संविधान ही हमारी आधारभूत विधि है। संविधान के आधार पर बनाए जाने वाले कानून वर्तमान समय में भी और भविष्य में भी आज़रबैजान गणराज्य तथा आज़रबैजान राज्य के विकास को सुनिश्चित करने वाले हमारे आधारभूत अभिलेख हैं। मिल्ली मजलिस इन्हीं कानूनों पर विचार करके उन्हें पारित करती है।

सत्ता के विभाजन के सिद्धान्त पर गठित किसी भी लोकतान्त्रिक राज्य में विधि-निर्माण का काम बहुत महत्व का होता है। विधि-निर्माण की गतिविधि से ही कानून बनाए जाते हैं और इन कानूनों के अनुसार ही लोग अपने-अपने क्रिया-कलाप करते हैं, अपना जीवन चलाते हैं और समाज का निर्माण होता है। राज्य की सभी शाखाएँ-प्रशाखाएँ अपने-अपने क्रिया-कलापों को सफलतापूर्वक निभाती चलती हैं। इसलिए मैं फिर से यह कहना चाहता हूँ कि विधि-निर्माण की गतिविधि राज्य की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि है। इस दृष्टि से आप लोगों का काम बहुत ही महत्व रखता है और आपके काम के जो परिणाम निकले हैं वे प्रशंसनीय हैं।

आज हम निश्चयपूर्वक यह कह सकते हैं कि वर्तमान आज़रबैजान राज्य, हमारा स्वतन्त्र आज़रबैजान गणराज्य सन् 1918 में बने लोकतान्त्रिक गणराज्य का ही उत्तराधिकारी है। उत्तराधिकारिता के इस सिद्धान्त का हम पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ पालन कर रहे हैं। निस्सन्देह, 1918-1920 और 1990 में बहुत अन्तर है या इन दो कालों के बीच बहुत अधिक दूरी है। किन्तु यह दूरी रिक्तता से नहीं भरी है – इन सत्तर सालों के दौरान आज़रबैजानी जनता ने अपने को बनाए रखते हुए अनेक रचनात्मक काम किए हैं, राष्ट्र के रूप में अपना विकास किया है और आज आज़रबैजान में जो आर्थिक, राजनीतिक, बौद्धिक तथा सांस्कृतिक क्षमता विद्यमान है उसका सृजन भी हमारी जनता ने किया है। यही सब कुल मिला कर सत्तर साल लम्बा युग है। आज़रबैजान लोकतान्त्रिक गणराज्य की अस्सीवीं जयन्ती को मनाते समय हम आज़रबैजान की जनता द्वारा तय किए गए अस्सी साल लम्बे सफ़र का, उसकी सारी उपलब्धियों का मूल्यांकन कर रहे हैं और अपनी उपलब्धियों का उत्सव मना रहे हैं।

निस्सन्देह, किसी भी देश को और कभी भी बिना बलिदानों और बिना क्षतियों के कोई उपलब्धि नहीं मिलती है। हमारे देश में, आज़रबैजान में भी ऐसा ही हुआ है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। हमारे इतिहासकारों को इसका विश्लेषण करना होगा, सब बातों को उनका उचित स्थान दिलाना होगा और सभी बातों का मूल्यांकन करना होगा। आज हम स्वतन्त्र आज़रबैजान राज्य की रचना कर रहे हैं। स्वतन्त्र आज़रबैजान राज्य की रचना करते हुए हम अपने ऐतिहासिक अतीत का भी मूल्यांकन करते चलते हैं, अपनी उपलब्धियों पर प्रसन्न होते हैं तथा क्षतियों और बलिदानों को लेकर दुखी होते हैं।

आज़रबैजान गणराज्य की मिल्ली मजलिस लोकतान्त्रिक गणराज्य द्वारा स्थापित संसद की ही उत्तराधिकारी है। उत्तराधिकारिता का मतलब होता है बड़ा उत्तरदायित्व। उत्तराधिकारिता का यह मतलब नहीं होता है कि आप किसी घटना को दोहराने लगें जैसी कि वह पहले घटित हुई थी या पहले जैसे स्तर पर ही रहें। विरासत के सिद्धान्त के महत्व को समझते हुए प्रत्येक उत्तराधिकारी को अपने से पूर्व के युग और घटनाओं का वारिस होने के नाते तत्कालीन व्यवस्था, युग और घटनाओं को अधिक ऊँचे स्तर पर ले जाना चाहिए। आज़रबैजान में हम यही कर रहे हैं और इस मामले में हमें काफ़ी सफलता मिली है।

मेरे विचार में आज़रबैजान की वर्तमान मिल्ली मजलिस लोकतान्त्रिक गणराज्य द्वारा स्थापित संसद की उत्तराधिकारी के रूप में उसके नाम को उजागर कर रही है और पिछले कुछ सालों के दौरान, विशेषकर हाल के वर्षों में, स्वतन्त्र आज़रबैजान राज्य के विकास के लिए इसने बहुत बड़ा काम किया है। इस सबके लिए मैं आपके प्रति अपना सम्मान अभिव्यक्त करता हूँ। मैं यह आशा व्यक्त करता हूँ कि भविष्य में भी आपको ऊँची-ऊँची सफलताएँ प्राप्त होंगी और आप इस सम्मानजनक नाम के योग्य सिद्ध होंगे।

आज़रबैजान की वर्तमान वास्तविकता को देखते हुए देश में और भी अधिक एकता तथा एकजुटता की ज़रूरत है। मुझे प्रसन्नता है कि आज़रबैजान की वर्तमान लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सत्ता की सभी शाखाओं के बीच में, संविधान के सिद्धान्तों के आधार पर, अच्छे सम्बन्ध स्थापित हुए हैं। ऐसा होने से हम सबके लिए – संसद के लिए भी, सर्वोच्च कार्यपालिका के लिए भी, सभी कार्यपालक अंगों के लिए भी - सफलतापूर्वक काम करने का बहुत अच्छा वातावरण तैयार हुआ है। संसद तथा राष्ट्रपति के बीच स्थापित हुए कार्योन्मुख, स्वस्थ और सैद्धान्तिक सम्बन्ध विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

आज दिए अपने भाषणों में सांसदों ने 1918-1920 के लोकतान्त्रिक गणराज्य के दिनों में घटित झगड़ों, सत्ता के लिए संघर्ष और व्यक्तिगत हितों की वजह से राष्ट्रीय हितों को पहुँची क्षति का उल्लेख किया है। यह सब अवश्य हुआ था। हमें अपने अतीत से सबक सीखना चाहिए। आज के समय में हमारे लिए उपयोगी उसके अच्छे पक्षों का हमें लाभ उठाना चाहिए और उसके हानिकारक पक्षों को फिर से उभरने नहीं देना चाहिए।

खेद की बात है कि पिछले छह सालों के दौरान स्वतन्त्र आज़रबैजान में कुछ वैसी ही घटनाएँ घटित हुई हैं जैसी कि 1918-1920 में घटित हुई थीं। इन घटनाओं से पैदा हुईं कठिनाइयाँ भी आज़रबैजान को अपनी राष्ट्रीय स्वतन्त्रता के मार्ग पर सफलतापूर्वक अग्रसर होने से रोक नहीं सकी हैं और न रोक ही पाएँगी। इस सबके बावजूद वर्तमान में भी और भविष्य में भी आज़रबैजान की मिल्ली मजलिस से लेकर राज्य के सभी अंगों में, हमारे समाज में, हमारी जनता में स्वस्थ सिद्धान्तों, मानवीय स्वतन्त्रता सुनिश्चित करनेवाले तथा पूर्ण वैचारिक बहुलता स्थापित करने वाले सिद्धान्तों के आधार पर नागरिक एकता, नागरिक एकजुटता, जनता में ऐक्य तथा एकात्मता स्थापित होनी ही चाहिए।

हम इसी मार्ग पर प्रयत्नशील हैं और प्रयत्न करते रहेंगे। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आज़रबैजान के राष्ट्रपति के रूप में इस कर्तव्य को मैं अपना सबसे प्रमुख उद्देश्य मानता हूँ। मेरे विचार में इस क्षेत्र में हमने बहुत कुछ प्राप्त किया है। परन्तु अभी बड़े-बड़े काम करने बाकी हैं। कुछ कमियाँ भी हैं जिन्हें दूर किया जाना जरूरी है। मुझे आशा है कि हमारे सम्मिलित काम के परिणामस्वरूप और आज़रबैजान के हमारे समाज में तथा राज्य के अंगों में विद्यमान वर्तमान अच्छे सम्बन्धों को आगे बढ़ाते हुए और भी अच्छा वातावरण तथा और भी अच्छी मनःस्थिति पैदा होगी और इस तरह से हममें और भी अधिक एकता तथा एकजुटता आएगी।

आज के दिन मैं एक बार फिर आपको इस शुभ अवसर पर बधाई देता हूँ। मेरे विचार में आज़रबैजान की संसद ‘मिल्ली मजलिस’ में लोकतान्त्रिक गणराज्य की स्थापना की अस्सीवीं जयन्ती पर आयोजित हुई यह विशेष चर्चा एक ऐतिहासिक घटना बन गई है। मैं आपके कुशल-मंगल की तथा कार्य में सफलता की कामना करता हूँ। 

बहुत-बहुत बधाई!

समाचार-पत्र "बकीन्स्की रबोची", 28 मई 1998